
धूलंडी क्यों मनाई जाती है – कहते हैं भगवान कृष्ण जन्म से ही नीले रंग के थे उनका रंग सब बच्चों से थोड़ा अलग था इसी वजह से वह सब से मिलजुल नहीं पाते थे खासकर राधा जी से तो वह दूरी बनाकर ही रखते थे क्योंकि राधा का रंग सफेद था और उन्हें लगता था कि राधा उनसे बात नहीं करेगी | 1 दिन कृष्ण जी ने अपनी मैया यशोदा से कहा मैया मैं क्यों काला राधा क्यों गोरी | मैं तो राधा से बात भी नहीं कर पाता अपने लाडले को समझाते हुए, हंसते हुए यशोदा बोली तो तुम राधा को रंग लगा दो फिर उसका रंग भी तुम्हारे जैसा हो जाएगा | कहते हैं यहीं से रंग लगाने की परंपरा चल पड़ी |
पुराने समय में होली केवल लाल गुलाल से ही खेली जाती थी समय बीतने के साथ-साथ आज के युग में हर रंग हमारे सामने उपलब्ध हो गया धीरे-धीरे पानी से होली खेलने का चलन भी आ गया | वैसे तो हर रंग का अपना वजूद है, प्रतीक है लेकिन फिर भी कुछ खास रंग है जो किसी खास प्रतीक को दर्शाते हैं जैसे –
रंग पीला ये सरसों का तो लाल प्यार का प्रतीक है
कान्हा का रंग नीला नीला तो बैंगन का रंग बैंगनी
रंग गुलाबी जचे गाल पर ,जब हुए भांग का असर चाल पर
यह रंग ऊनाभि चुकंदर की पहचान है तो
हरे रंग से लगे पता कि बसंत का आगाज है |
आप सभी को हमारी तरफ से होली की हार्दिक शुभकामनाएं | होली के रंगों की तरह आपकी जिंदगी भी रंग बिरंगी रहे | धन्यवाद !!
