“औरत ईश्वर की बेहतरीन रचना है जिसके बिना कोई रचना ही संभव नहीं”
कहते हैं हर कामयाब इंसान के पीछे एक औरत का हाथ होता है और जब वह कामयाब इंसान खुद एक औरत ही हो तो कामयाबी के मायने दोगुने हो जाते हैं | जिंदगी के हर सुख दुख में एक छवि हमेशा हमारे साथ खड़ी हुई महसूस होती है वह छवि एक औरत की है वह कभी मां के रूप में कभी पत्नी के रूप में कभी बहन तो कभी बेटी बनकर हर वक्त हमारा साथ पूरी ईमानदारी और सच्चाई से देती है आज भी जहां कहीं भी एक औरत को दूसरी औरत का साथ मिलता है तो कामयाबी के परचम लहराते जरूर है इसका ताजा उदाहरण है नई-नई मिस इंडिया रनर अप मान्या सिंह | गरीबी की मजबूरी के सामने पिता के द्वारा हौसला छोड़ देने के बावजूद अपनी मां से मिले साथ के सहारे अपना संघर्ष जारी रखा और आज नतीजा सबके सामने है |
वैसे तो सालों से औरतों ने हर क्षेत्र में कामयाबी अपने नाम की और सभी के लिए एक मिसाल बनी, लेकिन फिर भी जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह दूसरा पहलू यह है कि आज भी 21वीं सदी में होते हुए भी औरतों के साथ हर स्तर पर भेदभाव ,असमानता ,अमानवीयता की खबरें हमें रोज रोज अखबारों में पढ़ने को मिलती है हम सबको सरकार के साथ मिलकर इन सब बुराइयों के खिलाफ खड़े होना होगा | हर औरत को इस बारे में जागरूक होना पड़ेगा कि अगर उस पर कोई अत्याचार होता है तो वह इसके खिलाफ आवाज उठाएं , उसे झेलती ना रहे |
कहावत है कि” घर पहला विद्यालय होता है” तो हमें शुरुआत घर से ही करनी होगी | मेरी नजर में हर औरत को “शिक्षित” करके हम इस पहलू पर उनकी मदद कर सकते हैं अगर कोई औरत शिक्षित है तो
- वह अपने पैरों पर खड़े हो सकती हैं यानी आत्मनिर्भर हो सकती है |
- अपनी जिंदगी के हर फैसले खुद ले सकती हैं|
- अपने बच्चों में समानता का अधिकार रख सकती हैं|
- समाज में बराबरी का दर्जा ले सकती है अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर आवाज उठा सकती हैं बोल सकती हैं |
कहावतें
यदि कहीं कठोर अत्याचार और दुर्व्यहार के बदले में भी स्नेह और प्रेम हो सकता है, तो वह स्त्रियों में हो सकता है – शरतचन्द्र
वैसे तो हर दिन औरतों का दिन है लेकिन फिर भी किसी खास दिन को महिला दिवस के रूप में मनाने का तात्पर्य केवल औरतों को उनके महत्वपूर्ण होने का एहसास करवाने की दिशा में मात्र एक कदम भर है | जिस दिन हमें औरतों को उनकी उपलब्धियां गिनाने और उनकी अहमियत दर्शाने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं पड़े ,सही मायने में तभी हमारा “महिला दिवस” मनाना सफल हो पाएगा |
